Tuesday, January 11, 2011

उतरते पानी के साथ

बूढ़ी नीम की फुनगियाँ
पाठशाले की छत
उनचका टीला
सब
धीरे-धीरे लौट रहे हैं,

उतरते पानी के साथ...

रमिया परेशान हाल
सुबकती है
बंधे पर,

क्या लौट पायेगा
वो कमजोर क्षण
वो
नियति चक्र
जब
इसी बंधे पर
छोटे भाई के लिए
दो रोटियों की तलाश मे
वो गवां आई थी
"सब कुछ"

क्या वो भी लौटेगा
उतरते पानी के साथ??


*amit anand

5 comments:

  1. man ki darun dasha ko khoob ukera hai aapne........badhai swwekar karen.....

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  2. bahut karun katha kah di aapne is rachna mein bahut hi marmik abhivyakti

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  3. behadd umda ..hamesha ki tarah lajawaab, behadd mmarmik abhivyakti.

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  4. amit tum to lajabab ho yaar...kuchh shabd hi nahi hote..:)

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